जिला महिला अस्पताल की चार स्टाफ नर्स सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में दोषी

बदायूं। जिला महिला अस्पताल में भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण प्रसूता को इमरजेंसी से भगा दिया गया तो गेट पर जाकर डिलेवरी हो गई बाद में शिशु की मौत हो गई। इस मामले की जांच बैठी।जो कई दिन से पूरी हो गई है और डीएम कार्रवाई को आदेश दे चुके हैं। मगर स्वास्थ्य अधिकारी अब तक दबाए बैठे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों को निलंबित किया जाना है। खुद कार्रवाई का आदेश जारी न करके अब जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में आदेश जारी कराया जाएगा।

जिला महिला अस्पताल की चार स्टाफ नर्स सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में दोषी

करार हुई हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की संस्तुति की रिपोर्ट डीएम को दे चुके थे।

डीएम मनोज कुमार ने कार्रवाई के लिए पत्र सीएमओ और सीएमएस को दे दिया है। मगर यह सभी अधिकारी पिछले सप्ताह से लटकाये हुए हैं, इसको लेकर अब सीएमएस डा. इंदुकांत वर्मा ने साफ किया है कि सभी चारों दोषी स्टाफ नर्स निलंबित किये जाएंगे। मगर सभी एनएचएम के हैं इसलिए सीएमओ को निलंबित करना है। सीएमएस जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम की अध्यक्षता में ही निलंबित का आदेश जारी कराएंगे।

जिला महिला अस्पताल में भ्रष्टाचार की जांच कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने डीएम को जांच करने का आदेश दिया था। डीएम ने जांच जिला राजस्व अधिकारी जीत सिंह राय को सौंप दी। जांच करते करीब 20 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक डीआरओ ने जांच पूरी नहीं की है। शिकायतकर्ता युवा मंच के संस्थापक ध्रुव देव गुप्ता का कहना है कि जांच पूर्ण हो जाने के बाद भी डीआरओ जांच को दवाये बैठे हैं लेकिन जांच रिपोर्ट नहीं भेजी है।

वर्जन

डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस ज़िला महिला अस्पताल

डीएम का कार्रवाई आदेश सीएमओ के पास आया है। एनएचएम के कर्मचारी हैं सीएमओ कार्रवाई करना है हम तो कार्रवाई की संयुक्त में रखा गया। अब सीएमओ ने कहा एनएचएम के कर्मचारी हैं इसलिए जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में ही डीएम की अध्यक्षता में कार्रवाई कराएंगे।

शकील भारती संवाददाता

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