
बदायूं। इमामबाड़ा मुत्तक़ीन सय्यदबाड़ा में शेर ए ख़ुदा अली ए मुर्तुज़ा के जन्मदिन पर एक महफ़िल का आयोजन किया गया। जिसमे बदायूं के मशहूर शायरों और बच्चो ने कलाम पेश किया।
इतवार को मौला अली अ.स की योमे पैदाइश को अली डे के रूप में मनाया गया। इमामबाड़ा मुत्तक़ीन में जनाब अनवर आलम एडवोकेट अध्यक्षता व जनाब ग़ुलाम अब्बास (राजू) के संचालन में महफ़िल का आयोजन किया गया। महफ़िल का आगाज़ कलाम ए पाक से हुआ। डॉ एहसान रज़ा बदायूनी ने कलाम पेश करते हुए कहा कि अली को देखकर क़ुरआन पढ़ लिया जाए। डॉ ग़ुलाम अब्बास ने गुरूब हो भी गया हैं तो क्या हुआ सूरज, अली के इशारे पे वापसी होगी। ज़ैनुल इबा ज़ैदी ने कहा कि हराम ऐ पाक को मेराज हुई हैं हासिल, हर तरफ नूर की बारिश हैं अली आते हैं। रज़ा ज़ैदी ने कहा कि आमाद अली की होने को हैं, ला मका के घर, 13 रजब हैं नूर की बरसात क्यों ना हो। इसके अलावा जनाब साइब रिज़वान, अनाफ रिज़वान, मिन्हाल ज़ैदी, जुनैद अब्बास, कमर अब्बास, नुमान खान आदि लोगों का कलाम भी खूब पसंद किया गया। महफ़िल की सदारत जनाब अनवर आलम एडवोकेट ने मौला अली अ.स की ज़िंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि हमे इमाम अली अ.स के बताए हुए रास्तो पर चलना चाहिए। आखिर में जनाब जाबिर ज़ैदी ने सभी मोमिनीन का शुक्रिया अदा किया और सब को मुबारकबाद पेश की। इक़रार ज़ैदी, आरज़ू, नावेद, जरार हैदर, अब्बास हैदर, नबी हैदर, ख़ुमैल हैदर आदि लोगों ने महफ़िल में शिरकत की।
शकील भारती संवाददाता


