
बदायूँ।
में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान ने नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का स्वागत किया है। संस्था का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था जरूरी है।
वीओ—
काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का स्वागत किया है, जिसमें केंद्र सरकार से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे वैधानिक नियम बनाने की संभावना पर विचार करने को कहा गया है, ताकि नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
संस्था के मुताबिक, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया। याचिका में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय

लागू करने की मांग की गई थी।
काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान की सचिव मीना सिंह ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आज बड़ी जरूरत है। सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिगों को यौन शोषण, ट्रैफिकिंग और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों का शिकार बनाए जाने का खतरा रहता है। इसके अलावा निजी डेटा के दुरुपयोग और साइबर बुलिंग जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से बच्चों को ऑनलाइन शोषण और अन्य डिजिटल खतरों से बचाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

बताया गया कि याचिका पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा के पालन पर जोर दिया और केंद्र सरकार से इसे इंटरमीडियरी नियमों के ढांचे में शामिल करने पर विचार करने को कहा।
काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है और संस्था के अनुसार बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए देशभर में अभियान चलाया जा रहा है।
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