चराग़-ए-सुख़न के मासिक तरही मुशायरे में शायरों ने बंदी शाम

उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ सम्मानित

बदायूँ। संस्था चराग-ए सुखन द्वारा संस्था के सोथा मोहल्ला स्थित कार्यालय फरशोरी हाउस पर मासिक तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने बेहतरीन तरही कलाम सुनाकर खूब वाहवाही लूटकर समां बांध दिया।
मुशायरे की सदारत मशहूर उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर हाफ़िज़ सिद्दीक इस्लामिया इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य अब्दुल सुबूर खान मौजूद रहे।
सर्वप्रथम कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी का गुलपोशी के साथ शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।
वहीं मुख्य अतिथि अब्दुल सुबूर खान की गुलपोशी कर ज़ोरदार इस्तकबाल किया गया। इसके बाद शायर सादिक अलापुरी ने नात-ए-पाक पढ़कर नशिस्त का आगाज किया।

वरिष्ठ शायर सुरेन्द्र नाज़ ने ग़ज़ल –
दूर इतना भी न जा घर से कमाने के लिए,
दिल तरसता ही रहे वापस घर आने के लिए। सुनकर तालियां बटोरी।

वहीं सादिक अलापुरी की ग़ज़ल-
वो दिया रोशन करो तुम ज़िंदगी की राह में,
काम आए जो अंधेरों को मिटाने के लिए। को भी काफी दाद मिली।

सदारत कर रहे उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने इशारों में बात कही-
है जवां रहने का इनको शौक़ ये अय्याश हैं,
मीट बच्चों का इन्हें मिलता है खाने के लिए।

कार्यक्रम संयोजक शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने अपने कलाम के ज़रिए सामाजिक रिश्तों और जीवन के दर्शन को पिरोया –
दुश्मनी, शिकवे, गिले सबको मिटाने के लिए।
तुमको भेजा है खुदा ने मुस्कुराने के लिए।

अल्हाज आज़म फरशोरी की ये पंक्तियां-
ख्वाब में अक्सर अंधेरों को मिटाने के लिए
कोई आता है चराग़-ए-दिल जलाने के लिए। खूब पसंद की गईं।

डॉ दानिश बदायूंनी ने ग़ज़ल-
उसका शाना मुझको मिल जाए तो चैन आए मुझे
मुज़तरिब हैं मेरी आंखें उसके शाने के लिए। सुनकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।

संचालन कर रहे युवा शायर उज्ज्वल वशिष्ठ ने जब पंक्तियां-
अब बिछड़ना चाहता हूँ याद आने के लिए,
तुम बताओ क्या करूँ तुमको भुलाने के लिए। सुनाई तो तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

आखिर में अरशद रसूल की ग़ज़ल पढ़ी गई –
अब जो रूठे हो तो सारी ज़िन्दगी रूठे रहो
कोई आया है,न आएगा मनाने के लिए।

इस मौके पर मेहमान ए खुसूसी पूर्व प्रधानाचार्य अब्दुल सुबूर खान ने कहा कि ऐसी अदबी नशिस्त होती रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी नशिस्तों से साहित्य को एक नई दिशा मिलती है। सभी ने रूहानियत से जुड़े शेर पढ़ने के साथ सामाजिक मुद्दों पर भी अशआर सुनाए।
खास तौर पर उन्होंने शम्स मुजाहिदी बदायूनी का शुक्रिया अदा किया उन्होंने कहा कि शमसुद्दीन शम्स ने मुझे इस महफिल का हिस्सा बनने का मौका दिया इसके लिए मैं उनका दिल से शुक्रिया करता हूं ।
इसके अलावा शहाबुद्दीन शब्बू भाई, अल्हाज सालिम फरशोरी, जुनैद खान आदि श्रोतागण मौजूद रहे। आखिर में कार्यक्रम संयोजक डॉ शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
आज़म फ़रशोरो ने बताया कि अगला तरही मुशायरा सुरेन्द्र नाज़ के संयोजन में 10 मई को होगा जिसका मिसरा है –
“अभी मौसम में थोड़ी सी ‘नमी’ है”

 शकील भारती संवाददाता

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