ढिंढोरा खूब पीटा जा रहा है,
मगर आए न दिन अच्छे हमारे।
बदायूँ। चराग-ए सुखन संस्था की ओर से मासिक तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। मोहल्ला सोथा स्थित फरशोरी मंजिल कार्यालय पर मिसरा-ए-तरह “बहुत मशहूर हैं किस्से हमारे” पर शायरों ने पेश किए।शायरों ने महफिल को यादगार बना दिया।
मुशायरे का आगाज शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने नात-ए-पाक से किया। उन्होंने गजल के अशआर सुनाए-
हमें ढोना पड़ा तन्हा बुढ़ापा,
हुए बागी सभी बेटे हमारे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने की। उन्होंने कहा-
हमें है नाज़ उर्दू बोलते हैं,
बड़े शाइस्ता हैं लहजे हमारे।
अरशद रसूल ने गजल सुनाई-
ढिंढोरा खूब पीटा जा रहा है,
मगर आए न दिन अच्छे हमारे।
संचालन कर रहे कुमार आशीष ने पढ़ा-
कभी रहते थे हम सब साथ मिलकर,
अना ने कर दिए टुकड़े हमारे।
डॉ दानिश बदायूंनी ने अशआर में कहा-
वह जाकर जब मिले दिल से हमारे,
हुए तब खत्म सब शिकवे हमारे।
सुरेन्द्र नाज़ बदायूंनी ने गजल सुनाई-
थी अबकी जंग अपनों से हमारी,
कहाँ तक हौसले लड़ते हमारे।
आज़म फ़रशोरी ने कहा-
नहीं अब ज़र्रे भी अपने हमारे,
कभी हाँ चाँद तारे थे हमारे।
सादिक अलापुरी ने अपने अंदाज़ में पढ़ा-
अगर मुंह से बुरी बातें न निकले,
तो फिर हों चांद से चेहरे हमारे।
उज्ज्वल वशिष्ठ ने नई पीढ़ी पर टिप्पणी करते हुए कहा-
नए बच्चों की टीशर्टों में दबकर,
कहीं पर खो गए कुर्ते हमारे।

