
बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के डॉ. रहमान ने बताया कि हेपेटाइटिस C एक गंभीर रक्त-जनित वायरल संक्रमण है, जो HCV वायरस के कारण होता है। यह वायरस सीधे लिवर पर हमला कर उसे धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। समय पर उपचार न मिलने पर मरीज लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस C को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में वर्षों तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इस दौरान वायरस अंदर ही अंदर लिवर को क्षति पहुंचाता रहता है। बीमारी बढ़ने पर अत्यधिक थकान, पीलिया, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, भूख न लगना, उल्टी तथा गहरे रंग का पेशाब जैसे लक्षण सामने आते हैं।
डॉ. रहमान ने स्पष्ट किया कि यह बीमारी छूने, हाथ मिलाने, गले मिलने या साथ भोजन करने से नहीं फैलती। संक्रमण केवल संक्रमित रक्त के संपर्क से होता है। संक्रमित सुई या सिरिंज का उपयोग, बिना जांचा हुआ रक्त चढ़ाना, रेजर व टूथब्रश साझा करना तथा असुरक्षित टैटू या पियर्सिंग इसके प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस C की पहचान ब्लड टेस्ट से की जाती है। अच्छी बात यह है कि आधुनिक DAA दवाओं से 8 से 12 सप्ताह के उपचार में 95 प्रतिशत से अधिक मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। हालांकि अभी तक हेपेटाइटिस C की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी बचाव है।
डॉ. रहमान ने लोगों से अपील की कि बिना जांचा हुआ रक्त न लें और सुई-सिरिंज हमेशा नई एवं सुरक्षित इस्तेमाल करें।



कार्यालय संवाददाता आनंद प्रकाश