
बदायूं क्लब में साहित्यकारों की बैठक में तैयार हुई रूपरेखा
देश-विदेश में भी आयोजित होंगे कार्यक्रम
बदायूं। देश के गौरव और प्रख्यात राष्ट्रीय गीतकार कवि डॉ. उर्मिलेश के 75वें जन्म जयंती वर्ष को ‘डॉ. उर्मिलेश अमृत महोत्सव’ के रूप में बेहद भव्य तरीके से मनाया जाएगा। इसके तहत पूरे वर्ष विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक
कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित होगी। अमृत महोत्सव की शुरुआत आगामी 6 जुलाई को उनके जन्मस्थान व ननिहाल इस्लामनगर से एक भव्य कवि सम्मेलन के साथ होगी, जिसके संयोजक हितेन्द्र शंखधार होंगे।
यह निर्णय डॉ. उर्मिलेश जनचेतना समिति ने बदायूं क्लब सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया। जिले के प्रख्यात साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों ने गहन मंथन कर वर्ष भर के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की।
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मिति के सचिव डॉ. अक्षत अशेष ने बताया कि डॉ. उर्मिलेश का व्यक्तित्व साहित्य, संस्कृति, समाजसेवा और शिक्षा जैसे विविध आयामों से जुड़ा था। इन्हीं क्षेत्रों को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष भर लगातार विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके तहत ‘कविता चली गांव की ओर’ अभियान चलाया जाएगा, जिसमें उनके पैतृक ग्राम भतरी गोवर्धन पुर सहित जिले की सभी तहसीलों में कवि सम्मेलन और युवा प्रतिभाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी। शैक्षिक क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्तर की काव्य प्रतियोगिता और माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए जनपद स्तरीय काव्य व अन्य प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। सांस्कृतिक क्षेत्र में

अखिल भारतीय स्तर की भजन व ग़ज़ल संध्या सहित जिले के विराट आयोजन ‘बदायूं महोत्सव’ का आयोजन होगा। सामाजिक क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता, स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर जैसे सेवा कार्य किए जाएंगे। वहीं साहित्यिक क्षेत्र में अखिल भारतीय स्तर का कवि सम्मेलन, ऑल इंडिया मुशायरा का भव्य आयोजन, डॉ. उर्मिलेश के व्यक्तित्व व कृतित्व पर डाक्यूमेंट्री और विभिन्न विषयों पर सेमिनार व संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।

अमृत महोत्सव की संयोजक डॉ. सोनरूपा विशाल ने बताया कि डॉ. उर्मिलेश के देश-विदेश में रह रहे शुभचिंतक भी भोपाल, बीएचयू (वाराणसी) और लखनऊ साहित्य सभा आदि स्थानों पर अनेक आयोजन करने जा रहे हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी उनकी कविताएं, ग़ज़ल, गीत-नवगीत, मुक्तक और दोहे उपलब्ध कराए जाएंगे। इस विशेष वर्ष में भगवान हनुमान जी को समर्पित उनकी 700 चौपाइयों का संग्रह भी प्रकाशित किया जाएगा। बैठक में सदस्यों द्वारा डॉ. उर्मिलेश के गौरव ग्रंथ का प्रकाशन, उनके संदर्भ में एक टाइटल गीत, उनके नाम से ‘डॉ. उर्मिलेश सृजन सम्मान’ शुरू करने, विभिन्न युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने, उनके साहित्य को कोर्स (पाठ्यक्रम) में शामिल करने के लिए प्रयास करने, उनके अनछुए व अनछिपे पहलुओं पर चर्चा करने तथा जनपद के विविध स्थानों पर उनकी प्रसिद्ध रचनाओं का चित्रण व पेंटिंग कराने जैसे अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य रजनीश गुप्ता ने कहा कि उनकी याद में जो भी आयोजन हों, वे अत्यंत भव्य रूप में हों। डॉ. रामबहादुर व्यथित ने उनके साहित्य के सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करने पर जोर दिया। सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उनके साहित्य को कोर्स में लगवाने हेतु शासन स्तर पर पैरवी की जाए। डॉ. एस.के. गुप्ता ने बदायूं क्लब में स्थापित डॉ. उर्मिलेश की प्रतिमा एवं डॉ. उर्मिलेश मार्ग के जीर्णोद्धार हेतु जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर कार्य कराने की बात कही। समिति की अध्यक्ष मंजुल शंखधार ने सभी सम्मानित सदस्यों से वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों को अपने मार्गदर्शन और सहयोग से सफल बनाने की अपील की। संरक्षक श्यामजी शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संपूर्ण वर्ष जो भी आयोजन निर्धारित हों, वे उचित प्रकार से संयोजित और व्यवस्थित होने चाहिए, तभी सफलता निश्चित होगी।
बैठक का संचालन रविन्द्र मोहन सक्सेना ने किया और अंत में सचिव डॉ. अक्षत अशेष ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से वीरेन्द्र धींगड़ा, डॉ. मधु गौतम, डॉ. भास्कर शर्मा, डॉ. शैलेन्द्र कबीर, रवि भूषण पाठक, डॉ. मदनमोहन लाल, दीपक सक्सेना, प्रदीप शर्मा, भारत शर्मा, कुमार आशीष, राहुल चौबे, आलोक पाठक, पंकज शर्मा, नितेश वार्ष्णेय, नितिन गुप्ता, सुशील शर्मा, डॉ. सत्यम मिश्रा, मयंक गुप्ता, आदित्य श्रोत्रिय और इकबाल असलम आदि उपस्थित रहे।


कार्यालय संवाददाता आनंद प्रकाश